सिर्फ 9 लाख रुपये में बनी थी भारत की पहली हॉरर फिल्म
नई दिल्ली। आज हिंदी सिनेमा हो या फिर साउथ सिनेमा... हॉरर फिल्मों का क्रेज हर ओर है। हॉरर मूवीज का बॉक्स ऑफिस पर छा जाना यह दर्शाता है कि दर्शकों को यह जॉनर कितना पसंद है। आपने भूल भुलैया देखी होगी, 1920 देखी होगी या फिर स्त्री जैसी डरावनी फिल्में देखी होंगी जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा-खासा नोट छापा। मगर क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली डरावनी फिल्म कब शुरू हुई थी?
आज के समय में हॉरर फिल्मों का क्रेज काफी बढ़ गया है। हालिया फिल्मों को देखें तो अब मेकर्स हॉरर फिल्मों में कॉमेडी का तड़का लगा रहे हैं, जो उन लोगों को भी अट्रैक्ट कर रहा है जो डरावनी फिल्में देखने से परहेज करते हैं। मगर जब भारत की पहली हॉरर मूवी रिलीज हुई थी तो उसमें कोई कॉमेडी फैक्टर नहीं था।
इस फिल्म के हर सीन ने दर्शकों का दिल दहला दिया था। कहानी, सीन्स, किरदार और गाने सब कुछ ऑन-ट्रैक था। भारत की पहली हॉरर फिल्म का नाम है महल।
76 साल पहले रिलीज हुई थी पहली हॉरर मूवी
कमल अमरोही निर्देशित महल 1949 में रिलीज हुई थी। 2 घंटे 45 मिनट की इस डरावनी फिल्म में उस वक्त के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार, खूबसूरत अदाकारा मधुबाला, एम कुमार, कनु रॉय और लीला पांडे जैसे कलाकार अहम भूमिका में थे। बॉम्बे टॉकीज के बैनर तले बनी फिल्म उस वक्त की सबसे महंगी मूवीज में से एक थी।
हॉरर मूवी का कलेक्शन
महंगी स्टार कास्ट, शानदार सेट और सदाबहार गानों के साथ महल का एक-एक सीन बड़ी बारीकी के साथ कमल अमरोही ने शूट किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त यह फिल्म 9 लाख रुपये में बनी थी जिसकी आज 15 करोड़ रुपये से भी ऊपर कीमत है। आपको जानकर हैरानी होगी कि फिल्म ने उस वक्त कई गुना ज्यादा कमाई की थी। कहा जाता है कि इसने 1.25 करोड़ रुपये कमाए थे जिसकी आज कीमत 218 करोड़ रुपये है।
महल मूवी की कहानी
महल मूवी की कहानी रहस्य और पुनर्जनन के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी की शुरुआत हरि शंकर (अशोक कुमार) से होती है जो एक पुरानी हवेली में आता है, जिसे महल कहा जाता है। हवेली का चौकीदार उसे एक कपल की दुखद कहानी सुनाता है, जो वहां रहा करते थे।
प्रेमी की मृत्यु नदी में डूबने से हो जाती है और उसकी प्रेमिका कामिनी (मधुबाला) भी जल्द ही मर जाती है। हरि शंकर को पता चलता है कि हवेली का मालिक उससे हूबहू मिलता-जुलता था। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, रहस्यमयी घटनाएं और कामिनी की आत्मा का आभास हरि को परेशान करने लगता है।
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