राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग को हामिद अंसारी का समर्थन, सियासी बहस तेज
नई दिल्ली: देश भर में 28 मई को मनाए जाने वाले ईद-उल-अजहा (बकरीद) के त्योहार से ठीक पहले कुर्बानी को लेकर देश की राजनीति काफी गरमा गई है। कई राज्यों में गाय की कुर्बानी पर सख्त पाबंदी लगाए जाने के बाद, अब एक बार फिर गाय को भारत का 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की मांग तेज हो गई है। इस मांग का समर्थन अब देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी किया है। उन्होंने कहा कि अगर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से देश में शांति, भाईचारा और सौहार्द बना रहता है और हमेशा के लिए विवाद की जड़ ही खत्म हो जाती है, तो सरकार को इस पर जरूर विचार करना चाहिए।
पूर्व उपराष्ट्रपति बोले- यह मांग पूरी तरह सही है
एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार (इंडियन एक्सप्रेस) से बातचीत में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि उन्होंने खबरों में देखा है कि कुछ संगठन गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग उठा रहे हैं, जो उन्हें काफी तार्किक और सही लगी। उनका मानना है कि अगर किसी बड़े विवाद को हमेशा के लिए सुलझाया जा सकता है, तो ऐसा कदम उठाने में कोई बुराई नहीं है। हामिद अंसारी ने आगे कहा कि देश में गोवंश (गाय और बछड़े) के वध को रोकने के लिए अगर केंद्र सरकार ऐसा कोई फैसला लेती है, तो इसे एक सकारात्मक और अच्छा कदम माना जाएगा, हालांकि इस पर आखिरी फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार के हाथ में ही है।
मौलाना अरशद मदनी ने सबसे पहले उठाई थी मांग
आपको बता दें कि इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने हाल ही में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई थी। मौलाना मदनी ने कहा था कि गायों की अवैध खरीद-फरोख्त (तस्करी) और उनके वध में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार को बेहद सख्त कानून बनाना चाहिए ताकि इस मुद्दे पर बार-बार होने वाले विवादों को रोका जा सके।
कई मुस्लिम संगठनों और धर्मगुरुओं ने दिया समर्थन
मौलान मदनी के इस बयान के बाद देश के कई अन्य बड़े मुस्लिम संगठनों और धर्मगुरुओं ने भी खुलकर इस मांग का समर्थन किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि हिंदू समाज की धार्मिक आस्था और भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए। वहीं, शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने भी इस मांग को पूरी तरह जायज ठहराते हुए कहा कि सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद गंभीरता से विचार करना चाहिए।
विभिन्न राज्यों में कुर्बानी को लेकर कड़े नियम
बकरीद के मौके पर देश के कई राज्यों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बेहद सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:
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पश्चिम बंगाल: यहाँ साल 1950 के 'पशु वध नियंत्रण अधिनियम' को पूरी तरह सख्ती से लागू किया गया है। कानून के मुताबिक, कुर्बानी के लिए सरकारी पशु चिकित्सक (डॉक्टर) से जानवर का 'फिटनेस सर्टिफिकेट' लेना जरूरी है और बिना सरकारी अनुमति के कहीं भी वध नहीं किया जा सकेगा।
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दिल्ली: देश की राजधानी में गाय, बछड़े, ऊंट और अन्य प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी पर पूरी तरह से बैन है। प्रशासन ने साफ किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी नहीं दी जा सकेगी, इसके लिए केवल सरकार द्वारा तय की गई जगहों का ही इस्तेमाल करना होगा।
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उत्तर प्रदेश: यूपी सरकार ने भी गाय, ऊंट और बछड़ों की कुर्बानी पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सरकार के आदेश के मुताबिक, कुर्बानी केवल निजी या बंद स्थानों पर ही दी जा सकती है। इसके साथ ही सड़कों या किसी भी सार्वजनिक जगह पर नमाज पढ़ने और कुर्बानी देने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है।
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