अमेरिका ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन ने एक महीने के लिए विशेष अनुमति देते हुए इन प्रतिबंधों को 19 अप्रैल तक स्थगित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह राहत उन तेल खेपों पर लागू होगी, जो शुक्रवार तक जहाजों में लोड की जा चुकी थीं।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत उठाया गया है। इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अपने जवाबी हमलों का दायरा बढ़ाकर दुनिया भर के पर्यटन और मनोरंजन स्थलों को भी निशाना बना सकता है।

क्या ईरान पर कम होंगे अमेरिका-इस्राइल के हमले? 

इसी दौरान अमेरिका ने पश्चिम एशिया में और अधिक युद्धपोत और मरीन तैनात करने की घोषणा की। हालांकि कुछ घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनका प्रशासन क्षेत्र में सैन्य अभियान को कम करने पर विचार कर रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया, जब तेल कीमतों में उछाल के कारण अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई।

युद्ध के बीच विरोधाभासी संकेत सामने आ रहे हैं और संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा है। ईरान ने इस्राइल और खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। यह घटनाक्रम उस समय हो रहा है, जब क्षेत्र में धार्मिक महत्व का दिन मनाया जा रहा था और ईरान में लोग पारंपरिक नववर्ष नवरोज का उत्सव मना रहे थे।

दुनियाभर में गहरा रहा ऊर्जा संकट

ईरान से सीमित जानकारी सामने आने की वजह से यह साफ नहीं है कि अमेरिका और इस्राइल के हमलों से उसके परमाणु, सैन्य या ऊर्जा ठिकानों को कितना नुकसान हुआ है। ये हमले 28 फरवरी से जारी हैं। हालांकि, ईरान के हमलों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

अमेरिका और इस्राइल ने इस युद्ध के अलग-अलग कारण बताए हैं। इनमें ईरान के नेतृत्व को कमजोर करने के साथ उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को खत्म करना शामिल है। इन तमाम वजहों के बाद भी ईरान में फिलहाल न तो किसी बड़े जनविद्रोह के संकेत मिले हैं और न ही युद्ध के जल्द खत्म होने की कोई संभावना दिखाई दे रही है।