सेना ने नेपाल गए अपने सैनिकों की छुट्टी बढ़ाई
नई दिल्ली । सेना उन गोरखा सैनिकों की छुट्टी बढ़ा दी है जो नेपाल में हिंसा की वजह से स्वदेश नहीं आ पा रहे हैं। यही नहीं सेना ने उन जवानों को नेपाल ना जाने की सलाह दी है जो छुट्टी पर अभी नेपाल जाना चाहते हैं। इनकी छुट्टी को तत्काल होल्ड पर रख दिया गया है। हालांकि अब भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए नेपाल से नए गोरखा नहीं आ रहे हैं। करीब तीन साल पहले जब सेना में जवान स्तर पर भर्ती के लिए अग्निपथ स्कीम लाई गई थी तब इस स्कीम के तहत अग्निवीरों की भर्ती हुई थी। इन अग्निवीरों की सेना में भर्ती केवल चार साल के लिए हुई है। चार साल पूरे होने पर इनमें से 75 प्रतिशत अग्निवीर सेना से बाहर हो जाएंगे और केवल 25 प्रतिशत ही सेना में नौकरी कर पाएंगे। जब से यह स्कीम आई है तब से नेपाल के गोरखाओं की सेना में भर्ती रुक गई है। इस स्कीम के तहत नेपाल अपने युवाओं को सेना में भेजना नहीं चाहता है। नेपाल का साफ कहना है कि उनके युवाओं की पहले की तरह सेना में भर्ती हो यानि वह स्थायी तौर पर लिए जाएं और चार साल में ही उन्हें सेना न छोड़नी पड़े। अब सेना में नेपाल के वही गोरखा सैनिक बचे हैं जो जून 2022 के पहले सेना में भर्ती हुए हैं। इनमें से कई गोरखा सैनिक रिटायर हो चुके हैं। वैसे सेना में नेपाल के गोरखा आजादी के समय से ही रहे हैं। ये पहले ब्रिट्रिश आर्मी के हिस्सा थे। देश के आजाद होने के बाद वे भारतीय सेना का हिस्सा बने। आजादी के वक्त सेना में 10 गोरखा रेजिमेंट्स थीं। आजादी के बाद 6 रेजिमेंट भारत के हिस्से और 3 रेजिमेंट ब्रिट्रेन के हिस्से आई। वहीं एक रेजिमेंट को खत्म कर दिया गया। बाद में जाकर सेना में एक और गोरखा रेजिमेंट बनाई गई। अब भारतीय सेना में सात गोरखा रेजिमेंट्स हैं जिनमें 43 से ज्यादा बटालियन हैं।
आध्यात्मिक चिकित्सा: तुलसी पूजन और गो सेवा से मानसिक और शारीरिक व्याधियों का अंत
समस्याओं का अचूक समाधान हैं 'यंत्र'; जानें व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कौन सा यंत्र है सर्वश्रेष्ठ?
कैसा होगा आपका भविष्य? हस्तरेखा शास्त्र से समझें हाथ की रेखाओं और हथेली के आकार का मेल
सिर्फ शिष्टाचार नहीं, सेहत और सौभाग्य का प्रतीक है मेहमान को पानी देना; जानें क्या कहता है शास्त्र?
राशिफल 01 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष : हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की प्रतिबद्धता