क्या आप जानते हैं कि मोटर वाहन अधिनियम में ऐसे वाहनों के लिए सख्त नियम हैं, जिसमें मोटरसाइकिल साइलेंसर के नियम का पालन न करने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। आइए शुरुआत से मोटरसाइकिल साइलेंसर के नियमों को समझते हैं-

बाइक के तेज शोर पर सख्त कानून

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत बाइक के साइलेंसर को मॉडिफाई करके तेज आवाज करना गैरकानूनी है।

80 डेसिबल से ज्यादा शोर गैरकानूनी

नियमों के मुताबिक बाइक या कार का शोर 80 डेसिबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। मॉडिफाई साइलेंसर से यह 120 डेसिबल तक पहुंच सकता है।

स्पोर्ट्स बाइक की बढ़ती मांग

बाजार में स्पोर्ट्स बाइक की मांग बढ़ रही है, जिनका शोर सामान्य बाइक से ज्यादा होता है। अगर आपकी बाइक तेज आवाज करती है, तो यह पूरी तरह से गैरकानूनी है।

मॉडिफायड साइलेंसर से ध्वनि प्रदूषण

तेज आवाज वाले मॉडिफाईड साइलेंसर न सिर्फ कानों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी फैलाते हैं, जी हां, मॉडिफाईड साइलेंसर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई भी होती है।

तेज आवाज वाली बाइक पर चालान

अगर कोई वाहन तेज आवाज करता है तो उस पर चालान जारी किया जा सकता है, साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

मॉडिफाइड साइलेंसर

नियमों के अनुसार, चलते समय किसी भी बाइक या कार से अधिकतम 80 डेसिबल की आवाज आनी चाहिए। लेकिन मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने पर यह बढ़कर 120 डेसिबल से भी ज्यादा हो सकती है, जो कानूनन प्रतिबंधित है। हालांकि, तेज आवाज वाले साइलेंसर लगाने पर चालान 5,000 रुपये या उससे ज्यादा हो सकता है।

ड्राइविंग लाइसेंस हो सकता है सस्पेंड

अगर कोई चालक बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है।

जुर्माना और जेल दोनों संभव

अगर कोई व्यक्ति लगातार बाइक का साइलेंसर बदलकर ध्वनि प्रदूषण फैलाता है तो चालान के बाद उसे जुर्माने के साथ जेल भी हो सकती है।

सड़क पर सुरक्षा के लिए जरूरी नियम

तेज आवाज वाले साइलेंसर सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं, इसलिए इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।