मुंबई । स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर को लेकर  महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस गठबंधन सरकार में दरार पड़ती दिख रही है। सावरकर को भारत रत्न दिए जाने के मुद्दे पर शिवसेना सांसद संजय राउत और कांग्रेस के नेताओं के बीच पिछले कुछ हफ्तों से लगातार जारी बयानबाजियों के खाई बढ़ती जा रही है। दोनों दलों के बीच अंतिम बयानबाजी में जहां कांग्रेस ने 'वीर सावरकर' की आलोचना को दोहराते हुए उन्हें भारत रत्न दिए जाने का विरोध किया था। वहीं, शिवसेना के राउत ने कहा था कि सावरकर को भारत रत्न देने का विरोध करने वालों को उसी जेल में भेज देना चाहिए, जहां सावरकर को अंग्रेजों ने रखा था ताकि उनके संघर्षों का एहसास हो सके। पिछले सप्ताह में यह दूसरी बार है कि राउत ने अपने बयान से विवाद को जन्म दिया हो। कुछ दिन पहले ही राउत ने कहा था कि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी मुंबई में अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला से मिलने आती थीं। इस बयान के बाद कांग्रेस की ओर से कई नेताओं ने संजय राउत को आड़े हाथ लिया, जिसके बाद राउत को अपना बयान वापस लेना पड़ा। कांग्रेसी खेमे से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे ने फोन कर शिवसेना से गठबंधन के तहत कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को फॉलो करने की बात की। खड़गे ने कहा, 'ऐसे बयान गठबंधन के लिए सही नहीं हैं। हमें ऐसी भाषा नहीं बोलनी चाहिए, जिससे मतभेद बढ़े। सरकार चलाने के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम होता है, जिसे पुरानी बातों के बजाय फॉलो करना चाहिए। अगर हम पुरानी बातें ही करेंगे तो कई सारी चीजें सामने आएंगी।' कांग्रेस और शिवसेना के एक धड़े का भले ही यह मानना हो कि ऐसी बयानबाजियों से कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी गठबंधन पर असर नहीं पड़ेगा। लेकिन असल में इससे दोनों पार्टियां असहज नजर आ रही हैं। हालांकि राउत के बयान से खुद को दूर करने वालों में युवा सेना के अध्यक्ष तथा कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे भी शामिल हैं। आदित्य ने राउत के बयान को उनका निजी मत करार देते हुए कहा कि इतिहास में नहीं पहुंचना चाहिए। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि ऐसे विवादित मुद्दों पर 'सोच-समझकर शांति' बरत लेनी चाहिए।